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मायामा अनेक भूलहरू हुँदारहेछन्- गुरु केदार बराल |
गजल - मुस्कान व्लोन |
गित - घायलश्री |
गजल - रामवावु न्यौपाने |
फर्की आउन मिल्ने भए - दिवाकर अधिकारी |
गित - राज राई “संगम” |
इजरायलकी वुढी आमा - श्रीमती इश्वरी नन्दा पुरी |
गजल - भुपेन्द्र महत |
माया - जस्मिन श्रेष्ठ, |
खै कसरी (गजल) -सुनिल संगम |
गजल -ऋतु गिरी (हाल इजरायल) |
मैले लाएको माया -सुनिल पौडेल(आभागी) |
धोका – श्रीमती देवकी हुमागार्इं (खड्का) |
गजल - कृष्ण जि सी,प्युठान |
तिम्रा लागि (गजल) - हरि मानन्धर “विवश” |
मुक्तक - जस्मिन श्रेष्ठ(हाल इजरायल) |
जहाँ सिंगो देश अल्झिएको छ - कृष्ण थापा |
मैले केही दिन सकिन —श्रीमती सरीता शर्मा सुवेदी |
खौल परेको देश दाम्ला परेका नेता - पुरुशोत्तम सुबेदी -बेल्जियम |
गित - रमेश राई “गाउँले” |
हामी सबै उस्तै उस्तै -दिवाकर अधिकारी |
स्वार्थी तिम्रो मन - इन्दिरा तिम्सिना |
विदेशी जीवन - जस्मिन श्रेष्ठ, |
मेरो नेपालीपन - एन क्षेत्री, |
म जिउँदो नै रहेछु स्यानु पाईजा , म्याग्दी |
बाँकी छैन - जस्मिन श्रेष्ठ ( हाल इजरायल ) |
उठौ उठौ लाग्छ - राज राई “संगम” |
पिल्सिएको नेपाल -नवराज खड्का - इजरायल |
बिन्ती - जस्मिन श्रेष्ठ |
स्मृतिहरू - एन क्षेत्री |
पिडा - जस्मिन श्रेष्ठ |
तिम्रा रातहरु र मेरो सपनाहरु |
सन्देश - भानुभक्त पौडेल |
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मताएर मलाइ (गीत) -राकेश कार्की, लस् एन्जलस |
मेरो गाँउको यादमा (गीत)- राज राई "संगम" |
गजल-भुपेन्द्र महत |
इजरायलका इम्प्लोयर-विष्णु प्रसाद भट्टराई |
सपनाको महल -सुनिल पौडेल |
सायद यही हो माया- अञ्जु पुन |
भो म कविता लेख्दिन-विजी श्रेष्ठ |
हाइकू- नवराज आचार्य, इजरायल |
मनको व्याथा -मुस्कान व्लोन |
गजल- नरेश माङपहाङ राइ |
यस्तै हुँदो रैछ - सदिच्छा |
माया. .-पारु शर्मा |
दुइ कविता जीवन र पर्खाइ - राम विष्ट |
आमाको माया नपाएपछि. - - सुनिल पौडेल |
गजल-बसन्त मोहन अधिकारी |
गजल - धिताल सारांश |
आखिर....किन तिम्रो मनइन्दिरा तिम्सिना "कान्छी छोरी" |
गजल -भुपेन्द्र महत |
खोज - मुस्कान व्लोन |
मायामा यति प्रतिक्षा गरें..-सुनिल पौडेल |
जीवन -विष्णु प्रसादतिम ल्सिना |
गित (हाँस्य) - नरेश माङपहाङ राइ |
हाम्रो देशमा -राकेश कार्की |
जीवन शिखरमा टेक्नलाई हो-सुनिल पौडेल |
बसन्त बर्षा -कृष्ण प्रसाई |
मिलन विनाको विछोड- अञ्जु पुन |
खै के होउ कुन्नि तिमी-हरि मानन्धर |
सराप नदेउ मेरी आमानवराज खड्का |
क्रुरता दानवी, सहन वाध्य मानवी-विष्णु प्र. तिमल्सिना |
गजल -हरि मानन्धर |